बुधवार, 10 अगस्त 2011

आरक्षण निति में बदलाव होना चाहिये

देश में पिच्छले साठ साल से आरक्षण लागू है यानी पूरी तीन पीढ़ियाँ इसका लाभ ले चुकी हैं या ले रहीं है. दलित वर्ग में लगभग चार हज़ार उपजातियाँ हैं. इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति में भी हज़ारों उपजातियाँ हैं. यह देखा गया है आरक्षण का अधिकतर फ़ायदा कुछ ही दलित/अनुसूचित जनजातियों की उपजातियों तक ही सिमट कर रह गया है और उन्‍हें ही बार बार इसका लाभ मिल रहा है और ज़्यादातर उपजातियों को आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिल रहा है. अब समय आ गया हैं जब सरकार को आरक्षण नीति कि अच्छी तरह से समीक्षा करनी चाहिए और जिन उपजातियों का उद्धार हो चुका है उन्‍हे अनारक्षित करके जनरल कटेगरी में डाल देना चाहिए ताकि दूसरी उपजातियों का भी उत्थान हो सके l








अभिमन्यु त्यागी

स्वतंत्र लेखक 

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